ब्लॉग जगत में विचरण करते हुए अक्सर ही ऐसे ब्लॉग दिख जाते हैं जिनका रंग-रूप देख कर मन खुश हो जाता है। फिर तलाश की जाती है कि वह टेम्पलेट मिलेगा कहाँ? मिल जाए तो दिल बल्लियों उछलता है। उपयोग कर लिया जाए तो फिर महसूस होता है कि फलां कॉलम नीचे होता तो कितना अच्छा था, फलां चित्र के बदले वो वाला चित्र होता तो बढ़िया रहता!
आइए आज आपको बताया जाए कि अपना मनचाहा टेम्पलेट कैसे बनाया जाए। मनचाहा मतलब 2 कॉलम, 3 कॉलम, सबसे नीचे 3 कॉलम, दांए एक बड़ा सा कॉलम, नीचे 5 कॉलम, छोटे कॉलम, बड़े कॉलम… कैसे भी आपका मन करे बना सकते हैं। जो रंग चाहें, जो चित्र चाहें, जो आकार चाहें आपकी मर्जी। बस दिक्कत यह है कि यह HTML में अपनी आऊटपुट देता है, तो इसका उपयोग करने में कुछ सावधानियों रखनी पड़ती हैं। वैसे है बहुत आसान इसकी प्रक्रिया।
आप खुद ही देख लीजिए इसके बारे में यहाँ क्लिक कर के। अगर टेम्पलेट बनाना हो तो क्लिक करें यहाँ।
कैसा लगा यह जुगाड़? बताइएगा ज़रूर।
अपराध का नया रूप मोबाइल हैकींग
आप ई-मेल हैकिंग और कम्प्यूटर हैकिंग से तो वाकिफ होंगे ही। आजकल हैकिंग और हैकर्स अपने अपराधों की वजह से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। इनके बारे में अमूमन ही नए-नए समाचार हमें प्राप्त होते हैं। इन बातों से यह अंदाज़ा लगाया ही जा सकता है कि हैकिंग कितनी आसानी से हमारे बीच अपनी जगह बनाती जा रही है।इसी विकास का नतीजा है कि हैकिंग की यह तकनीक अब हमारे मोबाइल तक भी पहुँच गई है। अब हमारा सबसे विश्वसनीय साथी, हमारा मोबाइल भी इससे अछूता नहीं है।इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सेलफोन में लगने वाली चिप किस तरह से बनाई जाती है, इसका पता ये हैकर्स आसानी से लगा लेते हैं, इसलिए उसे आसानी से हैक कर लेते हैं।हैक होने वाले मोबाइल ज़्यादातर जीएसएम तकनीक पर काम करने वाले मोबाइल होते हैं। इन्हें हैक करने के लिए सिर्फ कुछ हार्डवेयर चाहिए जो आसानी से फोन से जुड़ जाता है। बस थोड़ी सी इलेक्ट्रॉनिक्स कि जानकारी होने पर हैकर आपके फोन को हैक करके आपके फोन मेमोरी की सारी जानकारी ले सकता है, कई बार तो आपके फोन में स्टोर की हुई जानकारी बदली भी जा सकती है।
इस तरह की हैकिंग के लिए यह ज़रूरी होता है कि हैकर आपके फोन को 3 से 4 मिनट के लिए उपयोग करे, बिना आपके फोन की ज़रूरी जानकारी के यह हैकिंग संभव नहीं। इसलिए अब अपना फोन किसी अजनबी को देने से पहले इस बारे में विचार ज़रूर कर लें।बढ़ते तकनीकी विकास की वजह से हैकर्स ने मोबाइल हैकिंग का एक तरीका और निकाल रखा है। इसके लिए वे उस फोन की तलाश में रहते हैं जिसमें ब्लूटूथ का उपयोग हो रहा हो। इसके लिए हैकर किसी भीड़ वाली जगह में अपने लैपटॉप पर हैकिंग सॉफ्टवेयर को एक्टिवेट करता है। यह सॉफ्टवेयर एक एंटीने के ज़रिए उपयोग में आ रहे नज़दीकी ब्लूटूथ के सिग्नल को पकड़ लेता है।
फिर अपने लैपटॉप के ज़रिए वह आपके मोबाइल पर उपलब्ध सारी जानकारी हासिल कर उसका उपयोग कर सकता है। इससे बचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि अगर आप ब्लूटूथ का उपयोग कर रहे हैं तो थोड़ा संभल जाएँ। अपने ब्लूटूथ को या तो इन्विज़िबल मोड पर रखें या फिर बंद रखें तो बहुत ही अच्छा है।
दूसरा तरीका यह है कि अपने फोन पर पासवर्ड का प्रयोग करें ताकि आपके फोन का उपयोग आप के अलावा कोई न कर पाए। इसके साथ ही आप अपने फोन को समय-समय पर अपडेट करते रहें तो यह आपका कंप्यूटर और नेट स्लो क्यो चलता है(काम लायक पोस्ट)
आपका कंप्यूटर और नेट स्लो क्यो चलता है(काम लायक पोस्ट)
क्या आप परेसान है कि आपना नेट स्पीड बहुत कम है और सोच रहे है की ये स्पीड तो नेट के स्पीड से निरभर करता है।
नही हर बार जरूरी नही है की आपका कंप्यूटर या नेट का स्पीड किसी एक चिज पर निर्भर करता है।
कई बार कई सारे पेज खोलने पर कंप्यूटर हैंग हो जाता है क्यो?
क्यो की आपके कंप्य़ूटर मे रैम की कमी आ जाती है।
ईसे दूर उसी समय कर सकते हैं। कैसे भाई? मै तो उछ्ल रहा हूं जवाब सूनने के लिये।
उसी समय अपना टास्क मैनेजर(alt+ctlr+delete) को आमंत्रीत करें। और Process पर क्लिक करें और आपको जो भी प्रोग्राम जाना पहचाना लगे जैसे realplayer.exe या EXPLORER.EXE(बडे अकछरो वाले) को टर्मीनेट कर दें।
अगर कोई ईंपोर्टेंट पेज खोले हैं तो आप दूसरे प्रोग्रामो को टर्मीनेट कर सकते हैं। पर अगर आप वेबसाईटो को बंद करना चाहते हैं तो EXPLORER.EXE या फायर फाक्स के लिये Firefox.exe टर्मीनेट कर दें और कुन्नू ब्लाग का वादा है की आपका कंप्यूटर कूछ हि सेकेंड मे वापीस चलते लगेगा।
यानी फीर से आप वेबसाईट आदी खोल सकते हैं। अगर आपके साथ हर बार होता है तो फायर फाक्स यूज करें क्यो की उसको टर्मीनेट करने पर जब उसे दोबारा रन करेंगे तो वो आपके पिछले खूले पेजो को वैसे का वैसा ही खोल देता है।
अगर आपका नेट बहुत स्लो चल रहा है, मतलब पहले कभी तेज चला हो पर ईस वकत धीरे तो वही करें जो मैने उप्पर बताया है।
क्यो की पेज को खूलने के लीये रैम की जरूरत होती है।
ईन सबसे बचने के लिये आप Rs.400 का 1 या 2BG का रैम खरीद के लगा सकते हैं पर आपको पता होना चाहीये की क्या आपका कंप्यूटर उतना MB,GB सपोर्ट करता है या नही।
कोई भी साईट आखिरी बार कब अपडेट हुई थी ,यह जानने का बहुत ही सरल तरीका
कोई भी वेबसाइट आखिरी बार कब अपडेट हुई है, यह पता करना कई मायनों मैं जरुरी हो जाता है ,मसलन उस पर मौजूद जानकारी, समाचार कितने पुराने है
ये जानने के लिए एक बहुत ही सरल तरीका है, वो मैं यहाँ बता रहा हूँ
जिस साईट के बारे में आप जानना चाहता है, पहले उसे खोले ,उसके ब्राउजर के URL Box में ये
javascript:alert(document.lastModified)
java script लिखकर इंटर प्रेस करें, बस आपने सामने एक पॉप्स-अप मेसेज में सारी जानकारी मिल जायेगी



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