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दीवाली में Tata Docomo देगा 3G सेवाएँ




3G सेवा का इन्तेजार अब जल्दी ही ख़त्म होने जा रहा है, Tata Docomo आगामी दिवाली पर 3G का तोहफा लेकर आ रहा है आपके लिए ।
वैसे तो BSNL, MTNL जैसी सरकारी कंपनिया कुछ क्षेत्रों में ये सुविधा उपलब्ध करा चुकी हैं पर Tata Docomo पहली निजी कंपनी है जो आपको 3G सेवाएँ उपलब्ध कराने जा रही है ।

टाटा टेलीसर्विसेस लिमिटेड (TTSL) ने थ्रीजी स्पेक्ट्रम की नीलामी में 9 टेलिकॉम सर्कल के अधिकार प्राप्त किये है और टाटा डोकोमो इन 9 सर्कल

1. महाराष्ट्र एवं गोवा,

2. पंजाब

3. हरियाणा

4. उत्तरप्रदेश (पश्चिम )

5. राजस्थान

6. गुजरात

7. कर्नाटक

8. केरल

9. मध्यप्रदेश -छत्तीसगढ़



में 3G सेवाएँ शुरू करने जा रही है ।


तो अब जल्दी ही विडियो कॉलिंग, मोबाइल टीवी, और तेज गति के इंटरनेट के उपयोग के लिए तैयार रहिये ।

ट्रेनों में वाई-फाई सिस्टम से आसान होगा इंटरनेट एक्सेस






भोपाल. अब ट्रेन में यात्रा करने वालों को इंटरनेट एक्सेस करने के लिए अपने साथ डेटा कार्ड रखने की जरूरत नहीं होगी। रेलवे ऐसे यात्रियों के लिए ट्रेनों में वाई-फाई सिस्टम लगाएगा, इस सिस्टम के लगते ही ट्रेन के किसी भी कोच में इंटरनेट एक्सेस किया जा सकेगा।

सिर्फ आपको अपने साथ लैपटॉप या पामटॉप ही रखना होगा। अगर सारे परीक्षण ठीक रहे तो दीपावली से नई दिल्ली और भोपाल के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस में यह सुविधा मिलने लगेगी। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस तरह की सुविधा यात्रियों को चलती ट्रेन में दिए जाने की पुष्टि की है।

हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी में टेस्टिंग: इस बार रेलवे हावड़ा और नई दिल्ली के बीच चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस के तीनों रैक में इस सुविधा की टेस्टिंग करने वाला है। इससे पहले चेन्नई राजधानी एक्सप्रेस में करीब आठ महीने पहले इस तरह की सुविधा की टेस्टिंग की गई थी,जो सफल नहीं हो सकी थी।

इसलिए रेलवे ने एक ही रूट पर चलने वाली हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस के तीनों रैक पर एक साथ इस सुविधा की टेस्टिंग करने का फैसला लिया है। अगर प्रयोग सफल रहा तो एक रूट पर रोजाना चलने वाली नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी जैसी ट्रेनों में इस तकनीक को सबसे पहले अपना लिया जाएगा।

यह फायदा होगा:इसका सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा जिन्हें अपने बिजनस के सिलसिले में हमेशा ऑनलाइन रहने की जरूरत होती है। साथ ही लंबी यात्रा के दौरान पढ़ाई करने और अपनी ऑनलाइन बैंक एकाउंट संचालन समेत अन्य सुविधाओं का लाभ भी चलती ट्रेन में लिया जा सकेगा।

शान-ए-भोपाल में भी ?

अगर वाई-फाई प्रयोग सफल रहा तो आईएसओ श्रेणी की गाड़ी भोपाल एक्सप्रेस का चुनाव अगले चरण में किए जाने की संभावना है।

यदि ऐसा होता है तो अन्य रेल मंडलों के पहले भोपाल एक्सप्रेस नया रिकॉर्ड कायम कर सकेगी।

रेलवे बोर्ड से आदेश मिलने पर हम अपने मंडल की ट्रेन में नई सुविधाएं बढ़ाते हैं, यात्रियों की सुविधा के लिए नई तकनीक का उपयोग ट्रेनों में किया जाना चाहिए। भोपाल एक्सप्रेस के बारे में निर्देश मिलते ही यात्रियों को इंटरनेट सुविधा मुहैया कराने की कोशिश की जाएगी।

टीवी पर इंटरनेट देखना हुआ आसान






बेंगलूर की एक कंपनी ने एक ऐसा सेट टॉप बॉक्स तैयार किया है जिसके जरिये आप इंटरनेट पर मौजूद वीडियो अपने ड्राइंग रुम में लगे टीवी के बडे स्क्रीन पर आसानी से देख सकेंगे। व्यू नाउ नाम से शुरु यह इंटरनेट टीवी प्लेटफार्म लोगों को अपने कंप्यूटर के छोटे स्क्रीन पर देखने के झंझट से मुक्ति दिलाएगा और इस तरह यह इंटरनेट वीडियो और टीवी के बीच की खाई को भी खत्म करेगा।

इस सेट टॉप बॉक्स को बनाने वाली कंपनी वेरिस्मो नेटवर्क्‍स के सह संस्थापक सतीश मुगुलवल्ली कहते हैं कि व्यू नाउ नए जमाने के मल्टीमीडिया इंटरनेट को टीवी जैसे एंटरटेनमेंट सिस्टम को एक साथ जोडता है। यह इंटरनेट को सीधे टीवी पर दिखाता है जिससे दर्शक बखूबी परिचित होते हैं। भारत में यह गजट इसी महीने लॉंच होने वाला है और इसकी कीमत पांच से छह हजार रुपये होगी।

फुल हुआ इंटरनेट आईपी एड्रेस बुक






    लंदन. वेबसाइटों के लिए सुरक्षित आईपी एड्रेस बुक 94 फीसदी भर चुका है। इसके चलते जल्द ही एक नए इंटरनेट प्रोटोकॉल वर्जन की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल इंटरनेट प्रोटोकॉल वर्जन (आईपीवी) 4 में नए आईपी एड्रेस के लिए 32 बिट के नंबर सिस्टम का प्रयोग होता है। इससे चार अरब कॉम्बिनेशंस तैयार किए जा सकते हैं।

    इसके भर जाने पर तकनीशियनों को आईपीवी 6 वर्जन लाना होगा। यह 126 बिट का होगा, जिससे कॉम्बिनेशंस की संख्या भी बढ़ जाएगी। अमेरिकन रजिस्ट्री फॉर इंटरनेट नंबर्स के मुख्य कार्यकारी जॉन करेन के अनुसार, नए आईपीवी 6 को अपनाने के लिए दुनियाभर के देशों को राजी करना एक बड़ी चुनौती है।

    अब इंटरनेट के जरिये टीवी देखना होगा मुमकिन





    सर्च इंजन की दुनिया का महारथी गूगल जल्द ही एक ऐसा साफ्टवेयर विकसित करने जा रहा है जिससे इंटरनेट के जरिये टेलीविजन देखना आसान हो सकेगा। इस नए सॉफ्टवेयर के विकास में सोनी कॉर्प, इंटेल कॉर्प और लॉजीटेक इंटरनेशनल साउथ अफ्रीका समेत कई कंपनियां रुचि दिखा रही हैं।

    कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू में स्थित गूगल फिलहाल इस तकनीक के विकास के लिए तीन हजार से अधिक डेवलपर्स से संपर्क में हैं जो 19 से 20 मई तक होने वाले इसके कांफ्रेंस में हिस्सा लेंगे।हालांकि इस मामले से जुडे एक जानकार ने बताया कि कंपनी इस तकनीक के और भी विकसित हो जाने तक इस पर विचार विमर्श में देरी कर सकती है। गौरतलब है कि गूगल अपनी नई तकनीकों से डेवलपर्स को रुबरु कराने के लिए साल में एक बार ऐसे कांफ्रेंस का आयोजन करता हैा गूगल, एप्पल इंक और अन्य कंपनियों ने जिस तरह स्मार्टफोन के लिए डेवलपर्स को अपनी ओर खींचा था उसी तरह गूगल के टीवी प्लेटफार्म के लिए भी डेवलपर्स की होड शुरु होने की उम्मीद हैा गूगल की नई तकनीक से शुरु की जाने वाली यह सेवा यूजर्स को इंटरनेट से सभी तरह की प्रोग्रामिंग तक पहुंच आसान कर देगा ा पिछले साल इस सिलसिले में शुरु हुआ टेस्ट कंपनी के बहुत कम कर्मचारियों और उनके परिवारों तक ही सीमित हैा

    फिल्म नहीं है, कम्प्यूटर पर ही देखें एक्स-रे








      इंदौर. 'एक्स-रे ले लिया है, कम्प्यूटर पर देखो और जाओ। एक्स-रे फिल्म खत्म हो गई है। डॉक्टर को तुम्हारी रिपोर्ट कम्प्यूटर पर ही दिखा देंगे।' नई डिजिटल एक्स-रे मशीन के नाम पर लगी नई कम्प्यूट्रेड रेडियोग्राफी मशीन से एक्स-रे करवाने पहुंच रहे मरीजों को जिला अस्पताल में आजकल यही सुनना पड़ रहा है।

      रेडियोग्राफी के मामले में आधुनिकता की ओर एक कदम बढ़ाते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी जिला अस्पताल में कम्प्यूट्रेड रेडियोग्राफी मशीन लगवाई है। इससे एक्स-रे लेने का काम शुरू भी हो गया है लेकिन एक्स-रे रिपोर्ट नहीं दी जा रही है।

      मरीजों को कम्प्यूटर की स्क्रीन पर ही एक्स-रे बता दिया जाता है। टेक्निशियन खुद ही बता देते हैं फलां-फलां खराबी है, डॉक्टर को बता दो, या हम ही बता देंगे क्योंकि अभी फिल्म नहीं आ रही है।

      डॉक्टर को कम्प्यूटर पर ही एक्स-रे दिखा देंगे। कई बार रिपोर्ट के लिए डॉक्टर को ओपीडी से उठकर एक्स-रे विभाग दौड़ लगाना पड़ती है। शुरुआती दिनों में टेक्निशियन को रिपोर्ट निकालने में भी परेशानी आई थी। हालांकि फोटो एडिटिंग के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था लेकिन प्रशिक्षण के अभाव के कारण यह समस्या आ रही थी। इसके बाद महीनेभर से एक्स-रे फिल्म ही सप्लाय नहीं किए जाने से एक नई परेशानी खड़ी हो गई। संभवत: पहली बार अस्पताल में ऐसा हो रहा है कि मरीज को एक्स-रे लेने के बाद एक्स-रे रिपोर्ट नहीं दी जा रही है।

      फिल्में मंगाई हैं

      एक्स-रे फिल्में मंगवाई है। कमी नहीं है, लेकिन किफायत से इस्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस या कानूनी मामलों में जरूरी होने पर एक्स-रे फिल्म निकालकर दी जा रही है। सामान्य मरीजों के एक्स-रे कम्प्यूटर पर ही देख लेते हैं। शासन से इसकी फिल्मों का सप्लाय अभी नहीं किया जा रहा है।

      डॉ. ए.पी.श्रीवास्तव, सिविल सर्जन


      सॉफ्टवेयर बताएगा एक्सीडेंट के कारण


      रोहतक. हाइवे पर होने वाले एक्सीडेंट पर अंकुश लगाने के लिए ट्रैफिक एंड हाइवे पुलिस ने सॉफ्टवेयर तैयार कराया है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि एक्सीडेंट कब, कैसे और किस परिस्थिति में हुआ।




      इन कारणों की समीक्षा होगी और बाद में समाधान किया जाएगा।




      हाइवे पर असमय ही मौत के आगोश में समां जाने वाली जिंदगियों पर कुछ हद तक विराम लगेगा। इस सॉफ्टवेयर को शीघ्र ही जिला मुख्यालय पर इंटरनेट से जोड़ दिया जाएगा ताकि एक्सीडेंट से संबंधित जानकारी जुटाई जा सके।




      नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे पर प्रति वर्ष करीब दो हजार दुर्घटनाएं होती हंै। जिसमें 15क्क् जिंदगी काल का ग्रास बन जाती हैं। अकेले एनएच-वन पर वर्ष 2009 में 1420 हादसे हुए थे, जिसमें 930 लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में ट्रैफिक एंड हाइवे पुलिस के लिए चिंता का विषय होना




      लाजमी है। इन हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने यह सॉफ्टेवयर तैयार कराया है।




      ऐसे करेगा कार्य




      प्रत्येक जिला मुख्यालय में इस सॉफ्टवेयर में एक्सीडेंट का डाटा फीड किया जाएगा। एक्सीडेंट की एफआईआर में जो कुछ लिखा जाएगा, वो सब इस सॉफ्टवेयर में फीड कर दिया जाएगा। बाद में समीक्षा की जाएगी कि एक्सीडेंट के कारण क्या रहे।




      एक्सीडेंट कौन से वाहन से अधिक होते हंै, वाहन में तकनीकी कमी थी, ड्राइवर की लापरवाही या मौसम में खराबी कारण रहा है। एक्सीडेंट की बारीकी से समीक्षा करने के बाद फिर उस कमी को दूर किया जाएगा।




      नमी वाले क्षेत्रों में होते हैं हादसे : मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक सड़क हादसे नमी वाले क्षेत्रों में होने की संभावना अधिक रहती है। हाइवे पर उन स्थानों पर सबसे ज्यादा हादसे हुए हंै, जहां सड़क नहरों के पास से गुजरती है।




      नमी अधिक होने के कारण सर्दी के मौसम में अधिक कोहरा छाया रहता है। जिससे वाहन चालकों को सामने से आ रहा वाहन दिखाई देने में परेशानी होती है। अधिकतर हादसे आधी रात के बाद ही होते है।








      वाशिंगटन । अमेरिका की मिशीगन यूनिवर्सिटी के एक इंजीनियर ने बिल्ली के दिमाग से प्रेरणा लेकर सुपरकंप्यूटर बनाया है। वी लू नाम के इस वैज्ञानिक का दावा है कि 14 हजार सीपीयू को जोड़कर बनाया यह सुपरकंप्यूटर विभिन्न प्रकार की जटिल गणनाएं करने में माहिर है। फिर भी यह बिल्ली के दिमाग से 83 गुना धीमा है।

      लू ने बताया कि इस सुपरकंप्यूटर को बिल्ली की दिमागी संरचना के समान आसान बनाया गया है। बिल्ली का दिमाग इंसानी मस्तिष्क से छोटा होता है, लेकिन इसकी संरचना बेहद जटिल होती है। लू का सुपरकंप्यूटर दिमाग की कुदरती संरचना पर आधारित है। यह आम हाईटेक कंप्यूटरों से कहीं ज्यादा तेज गति से गणनाएं कर सकता है

      हमारे सोचने पर चलेंगे कंप्यूटर



      न्यूयॉर्क. भविष्य में हम अपनी सोच के जरिए भी कंप्यूटर को निर्देश दे सकेंगे। इसके लिए दिमाग में चिप प्रत्यारोपित नहीं करना होगा। कारनेगी मेलॉन और पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ह्यूमन ब्रेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। इसमें इंसानी विचारों को समझने के लिए ईईजी,एफएमआरआई और मैग्नेटो इन्सेफेलोग्राफी की मदद ली जाएगी।

      अभी कंप्यूटर के पास इंसानी सोच को सही तरीके से पकड़ पाने की क्षमता नहीं है। वह शब्दों के अर्थ पर गौर करता है। इसे बदलने के लिए कंप्यूटर का नया एल्गोरिथ्म तैयार किया जा रहा है।

      इंटेल के इस एल्गोरिथ्म के जरिए कंप्यूटर 10 में से 9 मामलों में इंसानी सोच को सही तरीके से समझने में कामयाब हो जाएगा।

      गृहिणी ने बना दिया अनोखा कंप्यूटर







      बेंगलुरू कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। आवश्यकता के साथ थोड़ा सा कॉमन सेंस लगाया जाए तो बड़े-बड़े आविष्कार किए जा सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है आंध्रप्रदेश की चित्तूर की एक महिला ने। अपने पति के डेस्कटॉप कंप्यूटर में लगे अनगिनत तारों के कारण घर को ठीक से साफ न कर पाने से परेशान भार्गवी ने एक अनोखे कंप्यूटर के विकास में सफलता हासिल की है।

      भार्गवी ने एक ऐसे सिंगल यूनिट पर्सनल कंप्यूटर का निर्माण किया है, जिसमें सामान्य पीसी के सारे गुण मौजूद हैं। लेकिन तारों की संख्या घटकर केवल एक रह गई है। दिलचस्प यह है कि भार्गवी कोई कंप्यूटर इंजीनियर नहीं हैं। उन्होंने केवल 12वीं तक की पढ़ाई की है, और वह भी तेलुगु माध्यम में। भार्गवी के इस कंप्यूटर को कैबटॉप (कैबिनेट टॉप) कहा जा रहा है। यानी सामान्य पीसी का ही बदला हुआ एक रूप है। इसके सारे कल-पुर्जे सामान्य पीसी के ही हैं, लेकिन इनको एक साथ एक खास तरीके के बनाए हुए अकेले कैबिनेट में फिट किया गया है।

      भार्गवी ने बताया कि शुरू में उनके पति और परिवार वालों को उनके विचार पर काफी हैरानी हुई। लेकिन जब उन्हें लगा कि इस विचार में दम है तो उन्होंने भार्गवी की काफी मदद की। एक साधारण कंप्यूटर की तरह ही कैबटॉप में कोर टू डुओ का प्रोसेसर, 2 जीबी रैम और 320 जीबी हार्ड डिस्क लगा है। इसे एक टीवी के तौर पर भी प्रयोग मंे लाया जा सकता है और सिस्टम को चालू किए बिना ही इस पर फोटोग्राफ भी देखे जा सकते हैं।

      कैबटॉप के लिए तकनीकी सपोर्ट देने वाले भार्गवी के पति रंगा रेड्डी बताते हैं कि यह पूरा सिस्टम रिमोट कंट्रोल से भी चलाया जा सकता है और इसमें एक बिल्ट इन मल्टी मीडिया सिस्टम, टीवी तकनीक, स्पीकर और ऑटोमेटिक लॉक सिस्टम भी है। कैबटॉप बिजली की भी कम खपत करता और गर्म भी कम होता है। सबसे बड़ी बात है कि यह लैपटॉप की तरह पोर्टेबल है, लेकिन इसे लैपटॉप की तरह बैग की जरूरत नहीं होती।

      यह नया पीसी केंद्रीय विज्ञान और तकनीक विभाग की देखरेख में टेक्नोप्रेनियर प्रोमोशन प्रोग्राम के तहत बनाया गया है। आंध्र प्रदेश के आचार्य नागाजरुन विश्वविद्यालय ने इसके प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए शुरुआती पैसे दिए थे। इसे पेटेंट कराने के लिए रजिस्टर्ड करा लिया गया है। सेंट्रल मेकैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, दुर्गापुर मंे हुए परीक्षणों में इसे कारगर पाया गया है। साधारण पीसी को कैबटॉप में बदलने के लिए दो हजार से सात हजार तक का खर्च आ सकता है। बाजार में कैबटॉप की कीमत 18 हजार से 30 हजार तक रखी गई है।



      कम्प्यूटर पर ज्यादा बैठते हैं तो कीजिए ये एक्सरसाइ




      दिनभर कम्प्यूटर के सामने बैठे-बैठे हाथ-पैर, आंखे और पूरे शरीर की बुरी हालत हो जाती है। वैसे तो यह सब सामान्य बात ही नजर आती है परंतु इसका हमारे शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।


      दिनभर कम्प्यूटर पर कार्य करने वाले अधिकांश लोगों में एक समय बाद चिड़चिड़ापन आ जाता है और वे मानसिक तनाव भी झेलते हैं। जिससे उनका पारिवारिक जीवन और कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। समय रहते इस तनाव को दूर करने का उपाय कर लिया जाए तो आप भी हमेशा खुश और स्वस्थ रह सकते हैं। आपकी आंखों की रोशनी हमेशा चमकती रहेगी और चश्मों आदि से निजात मिलेगी।


      यह एक्सरसाइज करें


      - कम्प्यूटर पर कार्य करने वाले लोगों की आंखों पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। इसलिए आंखों की सुरक्षा के लिए आंखों की पुतलियों को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाए। फिर गोल-गोल घुमाएं। इससे आंखों की रोशनी बढ़ेगी और आंखों को ठंडक मिलेगी।
      - बैठे-बैठे पीठ दर्द करने लगती है तो इस दर्द को दूर करने के लिए दोनों हाथों से कोहनियां से मोडि़ए और दोनों हाथों की अंगुलियों को कंधे पर रखें। अब दोनों हाथों की कोहनियों को मिलाते हुए और सांस भरते हुए कोहनियों को सामने से ऊपर की ओर ले जाएं। कोहनियों को घुमाते हुए नीचे की ओर सांस छोड़ते हुए ले जाएं। कोहनियों को विपरीत दिशा में भी घुमाइए।
      - गर्दन दर्द से बचने के लिए गर्दन को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाएं। गोल-गोल घुमाए। इससे आपकी गर्दन का दर्द ठीक हो जाएगा।
      यह क्रियाएं प्रतिदिन करने पर कुछ ही दिनों में आप मानसिक तनाव से मुक्ति प्राप्त कर लेंगे और फिर अच्छे से कार्य कर सकेंगे।



      लो अब कंप्यूटर भी हो गया 3डी





      3डी का मजा लेने के लिए आप या तो थियेटर में जाते हैं या फिर कुछ कंपनियों ने 3डी टेलीविजन बाजार में लांच किया है। लेकिन अब आप अपने कंप्यूटर पर भी 3डी का मजा ले सकते हैं। साउथ कोरिया की जानी मानी इलेकट्रॉनिक कंपनी एलजी ने ऐसा 3डी पर्सनल कंप्यूटर तैयार किया है। जिसमें 3डी का मजा लिया जा सकता है। यानी इस पर लंबाई, चौड़ाई के साथ ही विजुअल की गहराई भी दिखेगी। आमतौर पर फिल्में या टीवी कार्यक्रम 2डी होते हैं।

      एलजी कंपनी ने अपने इस खास पीसी के डेस्कटॉप और लैपटॉप के तीन मॉडल तैयार किए हैं। यह कंप्यूटर थ्रीडी फिल्में भी दिखा सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको एक खास तरह का चश्मा पहनना पड़ेगा। 3डी लैपटॉप की कीमत 1,315 डॉलर यनि करीब 61,400 रुपये है । कंपनी अपने इस लेटेस्ट प्रोडक्ट को अगले महीने तक लैटिन अमेरिका, वेस्ट एशिया और अफ्रीका के बाजार में उतार देगी।

      मुश्किल में न डाल दे कंप्यूटर की कुंडली

      Source: भास्कर न्यूज   |   Last Updated 04:59(10/03/10)
       
       
       
       
       
       
      पानीपत. माडल टाउन वासी रमेश के परिजनों ने मुजफ्फरनगर निवासी सरिता की कंप्यूटर से कुंडली बनवाई तथा पंडित से दोनों कुंडलियों का मिलान भी करवाया। कुंडली के मिलान के समय पंडितों ने दोनों कुंडलियों का मिलान असंभव करार दिया। परिजनों ने रमेश और सरिता की कुंडली कंप्यूटर की बजाए प्राचीन तरीके से तैयार करवाई।

      इसके बाद दोनों कुंडलियों का आश्चर्यजनक रूप से मिलान भी हो गया। दोनों के गुण भी 36 में से 30 मिले। यह परेशानी केवल एक रमेश या सरिता की नहीं बल्कि हर उस व्यक्ति की है, जिसने लग्न के समाप्ति काल में जन्म लिया हो। ऐसे लोगों को भी कंप्यूटर से बनी कुंडली में परेशानी होती हैं। कंप्यूटर से तैयार कुंडली में लग्न बदल जाता है। इससे ग्रहों की स्थिति में फर्क आ जाता है।

      क्या है लग्न : जातक के जन्म के समय में पूर्वी क्षितिज में जो राशि होती है, उसे जातक का लग्न कहा जाता है। सभी लग्नों की अवधि अलग-अलग होती है। लगभग प्रत्येक लग्न 2 घंटे से अधिक समय का होता है।

      लग्न समाप्ति पर होती है परेशानी : लग्न समाप्ति के समय जन्म लेने वाले बच्चों की कंप्यूटर से तैयार कुंडली में कई त्रुटियां आ जाती हैं। इस बारे में ज्योतिष में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा धारक डा. महेंद्र शर्मा बताते हैं कि कंप्यूटर द्वारा तैयार कुंडली में बेलांतर संस्कार नहीं किया जाता, जिसके कारण लग्न का हेर-फेर हो जाता है। इसी वजह से कुंडली में ग्रहों की स्थिति और प्रभाव भी पलट जाता है।

      पहले जाएं इलाहाबाद

      डा. महेंद्र शर्मा बताते हैं कि कुंडली तैयार करने के लिए सबसे पहले समय को इलाहाबाद ले जाया जाता है। इसके लिए भारत के सूर्य घड़ी के समय 83 अंश 30 कला में से जन्मस्थान वाले शहर का सूर्य घड़ी का समय घटाया जाता है।

      प्राप्त संख्या को चार से गुणा करने के बाद जो संख्या आती है, उसे जातक के जन्म समय में से घटा देना चाहिए। इससे हमें वह समय प्राप्त हो जाता है, जो जातक के जन्म के दौरान इलाहाबाद में होता है। इस तरह से पूरे देश में कुंडली बनाते समय सबसे पहले इलाहाबाद पहुंचा जाता है। इसे देशांतर कहते हैं।

      देशांतर के साथ-साथ बेलांतर भी है जरूरी

      देशांतर के अलावा बेलांतर करना कुंडली का सबसे जरूरी हिस्सा है। कंप्यूटर की कुंडली में बेलांतर ही नहीं किया जाता। बेलांतर का सीधा सा अर्थ है सूर्य को सिर पर लाना। पूरे वर्ष में प्रत्येक स्थान पर अलग-अलग समय में केवल चार बार ही सूर्य सिर पर होता है।

      इसके लिए विद्वानों द्वारा प्रत्येक शहर की सारणी तैयार की गई है। इसी बेलांतर को सारणी के अनुसार ही जन्म समय में घटाया या बढ़ाया जाता है। इस संस्कार को करने के बाद ही सही कुंडली तैयार की जा सकती है।

      चीन ने बनाया शक्ति - शाली सुपर कम्प्यूट






      बीजिंग. चीन ने एक ऐसा सुपर कम्प्यूटर विकसित करने में सफलता हासिल की है जो प्रति सेकंड एक क्वाड्रिलियन (1000 खरब) से भी अधिक गणनाएं सफलतापूर्वक कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह चीन का अब तक का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर है।

      'झिंगयुन' नामक इस सुपर कम्प्यूटर को तिआनजिन में विकसित किया गया है। यह चीन में मौजूद पिछले सुपर कम्प्यूटर 'तिआनहे-१' से दोगुनी गति से काम करता है। 'तिआनहे-१' का विकास चीन की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी ने अक्टूबर २क्क्९ में किया था। यह अपनी सर्वोच्च गति पर काम करते हुए तीन क्वाड्रिलियन की गति पकड़ लेता है।

      कंप्यूटर बताएगा कहां पहुंची ट्रेन





       

      बिलासपुर। अगर आप ट्रेन में सफर करने वाले हैं, तो अपको ट्रेन की सही स्थिति जानने के लिए पूछताछ केंद्र के भरोसे रहने की जरूरत नहीं है। आप कंप्यूटर पर एक क्लिक से ट्रेन की सही स्थिति ही नहीं, बल्कि यह भी जान लेंगे कि ट्रेन किन स्टेशनों के बीच दौड़ रही है। भारतीय रेल की सुविधा के लिए यात्रियों को 'ट्रेन इंक्वायरी डॉट कॉम' पर क्लिक करना होगा।


      ट्रेन के इंतजार में प्लेटफार्म पर घंटों खड़े रहने के दिन लद गए हैं। अब यात्री घर बैठे यह जानकारी हासिल करेंगे कि उनकी उनकी ट्रेन अभी किस स्टेशन पर है और वह कितने घंटे लेट चल रही है। यानी यात्री घर से प्लेटफार्म के लिए तब निकलें, जब उनकी ट्रेन पहले वाले स्टेशन से छूट चुकी हो। दरअसल भारतीय रेल ने अन्य सुविधाओं की तरह ट्रेनों की स्थिति बताने वाले सिस्टम का भी कंप्यूटरीकरण किया है। इसे नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (एनटीआईएस) के नाम से जाना जाएगा।


      यह एक ऐसा सिस्टम है, जिसका सीधा संपर्क रेलवे कंट्रोल रूम से होता है। एनटीआईएस ट्रेन की सही जानकारी कंट्रोल रूम से लेकर वेबसाइट पर अपलोड करता है, ताकि यात्रियों को यह पता चल सके कि ट्रेन किस स्टेशन में कितने बजे पहुंची और कितने बजे छूटी। इतना ही नहीं, यह भी पता चलेगा कि ट्रेन कितने घंटे देर से चल रही है। यह जानकारी ट्रेन के ठहराव वाले स्टेशन में पहुंचते ही अपडेट होती है, यानी यात्री एक क्लिक से पता लगा लेगा कि उसकी ट्रेन सफर शुरू करने वाले स्टेशन से कितनी दूरी पर है और किस समय पहुंचेगी। इन तमाम सुविधाओं के लिए यात्रियों को www.trainenquiry.com पर जाना होगा।


      ऐसे करेगा काम


      'ट्रेन इंक्वायरी डॉट कॉम' पर जाने के बाद यात्रियों को सफर वाले ट्रेन का नंबर दर्ज करना होगा। नंबर दर्ज करने के बाद यात्री को दिए गए विकल्प पर क्लिक कर बताना होगा कि वह किस स्टेशन से किस दिन सफर करने वाला है। इतनी जानकारी मिलते ही साइट संबंधित ट्रेन की तमाम जानकारी डिस्प्ले कर देगा। यात्रियों को ट्रेन के पहले स्टेशन से छूटने के सही समय की जानकारी तो मिलेगी ही, यह भी पता लग जाएगा कि ट्रेन कितनी देर से छूटी है और कितने घंटे लेट से चल रही है। इसी तरह यात्री 'फाइंड योर ट्रेन' पर क्लिक कर मंजिल तक जाने वाली सभी ट्रेनों की जानकारी ले सकेंगे। सामने दर्शाई गई ट्रेनों पर क्लिक कर यात्री उस ट्रेन का शेड्यूल भी जान सकेंगे।


      परेशानी क्या


      हरेक यात्री की इच्छा रहती है कि वह प्लेटफार्म पर पहुंचे और ट्रेन आ जाए, ताकि प्लेटफार्म पर ज्यादा इंतजार न करना पड़े। अमूमन यही होता है कि यात्री ट्रेन की सही स्थिति घर बैठे जानने के लिए रेलवे पूछताछ केंद्र का नंबर घुमाते हैं। पहले तो नंबर इंगेज मिलेगा और अगर बात हो भी जाए तो सही जानकारी नहीं मिल पाती। पूछताछ केंद्र से ट्रेन के आधे घंटे लेट होने की जानकारी मिलती है और प्लेटफार्म पहुंचते तक ट्रेन दो घंटे लेट हो जाती है, यानी ट्रेन के इंतजार में परेशान होना ही पड़ता है।


      यात्रियों को ट्रेनों की परफेक्ट पोजिशन घर पर ही उपलब्ध कराने के लिए एनटीआईएस तैयार किया गया है। यात्री ट्रेन इंक्वायरी डॉट कॉम पर जाकर ट्रेन सही जानकारी हासिल कर सकते हैं, जिससे ट्रेन के इंतजार में घंटों खड़ा रहना नहीं पड़ेगा।

      जानेंगे इंटरनेट, सीखेंगे कंप्यूटर







      जोधपुर. दैनिक भास्कर समर्पण अभियान के तहत सीनियर सिटीजंस और गृहिणियों के लिए निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण के दूसरे दौर का दूसरा पंद्रह दिवसीय शिविर बुधवार से भास्कर कार्यालय में प्रांरभ हुआ। पारस ब्लड बैंक के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में आए बुजुर्गो और गृहिणियों ने कंप्यूटर का बेसिक नॉलेज प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया। पारस ब्लड बैंक के चेयरमैन सुखराज मेहता ने सभी प्रतिभागियों को गुलाब भेंट कर उनका स्वागत किया।

      आप भी रजिस्ट्रेशन करवाएं

      इस प्रोग्राम के अगले बैच में शामिल होने के लिए तीस साल से अधिक उम्र की महिलाएं और पचास साल से ऊपर के पुरुष रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। सभी को बारी-बारी बैच में बुलाया जाएगा। रजिस्ट्रेशन गुरुवार से शनिवार तक मोबाइल नंबर 9672910104 पर शाम सात से नौ बजे के बीच करवाया जा सकता है।

      घर में होती है हिचक

      शिविर में आए अधिकांश बुजुर्गो का कहना था कि वे पोते-पोतियों और नातियों से कंप्यूटर नहीं सीख पा रहे थे। घर में कंप्यूटर होते हुए भी हिचक होती थी। भास्कर के इस प्रोग्राम के बारे में सुना और पिछले साल इसमें कंप्यूटर सीखने वालों से चर्चा हुई तो मन बना ही लिया। अब हम भी कंप्यूटर की बारीकियां सीखेंगे। कम से कम इस पर इंटरनेट चलाना तो जान ही लेंगे। कुछ लोगों का कहना था कि वे लेखन में रुचि रखते हैं। इसलिए कंप्यूटर सीखकर अपने विचार इसी पर लिखेंगे।

      पांवों पर खड़ा होना है

      एक हाउस वाइफ का कहना था, घर परिवार को आर्थिक सहयोग देने के लिए पांवों पर खड़ा होना चाहती हूं। आजकल कंप्यूटर बिना कहीं भी बात नहीं बनती। इसलिए भास्कर के इस प्रोग्राम का लाभ उठाने चली आई हूं। पांच महिलाओं का पूरा ग्रुप ही कंप्यूटर सीखने आया है, जिनमें मां-बेटी भी शामिल हैं।

      नया जमाना, नया है ट्रेंड






      भोपाल। कंप्यूटर गेम्स, इंटरनेट और टेलीविजन के दौर में माना जा रहा है कि कुछ दशकों बाद प्रिंटेड बुक्स का क्रेज कम हो जाएगा। नेट फ्रेंडली यंग जनरेशन हर चीज को स्क्रीन पर देखना चाहती है लेकिन ऐसा नहीं है। आज भी किताबों की अपनी अलग अहमियत हैं। किताबों के प्रति हर वर्ग में दिलचस्पी पहले की अपेक्षा बढ़ी है। फर्क यह है कि उनकी पसंद बदलते दौर के साथ चेंज हुई है। पसंद के करवट लेते इसी पड़ाव को भांपा सिटी भास्कर ने। एक तुलनात्मक रिपोर्ट।

      हाईटेक होती लाइफ स्टाइल में लोग तेज रफ्तार से भाग रहे हैं। वे टेक्नोफ्रेंडली हो गए हैं। ऐसे में भी किताबों का अपना खास स्थान है। बदलते परिवेश और समय के संदर्भ में लोगों की पसंद भी बदली है। इस सबके बावजूद किताबों का महत्व और उनसे जुड़ाव का रिश्ता मजबूत हुआ है।

      बच्चें में बढ़ा ग्राफिक कामिक्स का क्रेज

      पहले बच्चे जहां चाचा चौधरी, बिल्लू , फैंटम आदि की कॉमिक्स पढ़ते थे। आजकल उन्हें मनोरंजक किस्से, कहानियां और नॉवेल के अलावा ग्राफिक बुक्स पसंद आ रही हैं। 6-14 साल तक के बच्चों में इंटरनेशनल बुक्स पढ़ने का क्रेज बढ़ा है। एस्ट्रिक्स सिरीन, नैन्सी ड्रयू, हैरी पॉटर सीरीज की किताबें काफी लोकप्रिय हैं। साथ ही एनिड ब्लायटन की हॉरर सीरीज, हैना मोन्टाना, गूज बम्स सीरीज की बुक्स भी काफी पसंद की जा रही हैं। ग्राफिक कॉमिक्स इन दिनों बच्चों की पहली पसंद बनी हुई हैं।

      क्या है ग्राफिक नॉवेल/कॉमिक्स

      ग्राफिक नॉवेल कॉमिक्स बुक्स की तरह हैं। इनमें शॉर्ट स्टोरीज का कलेक्शन होता है। ये बच्चों और टीनएजर्स में काफी लोकप्रिय हैं। इनमें शिक्षाप्रद कहानियों को मजेदार विजुअल्स के सहारे काफी रोचक तरीके से बताया जाता है। इनके विजुअल्स इतने जीवंत होते हैं, मानो आप इवेंट को खुद अपनी आंखो से देख रहे हों। द डेथ ऑफ सुपरमैन, द रिटर्न ऑफ सुपरमैन, वर्ल्ड विदाउट ए सुपरमैन आदि ग्राफिक बुक्स पढ़ते समय पूरा चित्र सामने उभरकर आ जाता है। आजकल बाजार में अलग-अलग विषयों पर ग्राफिक नॉवेल उपलब्ध हैं। जैसे सुपरहीरोज, फैंटेसी, साइंस, फिक्शन, हिस्टोरिकल, एक्शन, रियलिस्टिक, फिक्शन आदि।

      टीनएजर्स की पसंद कैंपस बेस्ड बुक्स

      स्कूल में हायर क्लास और कॉलेज में पढ़ने वाले टीनएजर्स पहले कॉम्पिटीशन सक्सेस, जनरल नॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं पर अधारित किताबें पसंद करते थे। आजकल वे मैरीकेट एंड एस्ले, मिल्स एंड बून्स, चेतन भगत के साथ ही रोमांटिंक कहानियों की किताबें, कैंपस एंड कॉलेज लाइफ एवं दोस्ती पर आधारित किताबें खूब पढ़ रहे हैं। किताबों के ई-बुक का रूप लेने के बाद ई-बुक रीडर और ऑडियो बुक भी युवाओं की पसंद बन रही है।

      प्रोफेशनल्स को भाए सक्सेस के फंडे

      प्रोफेशनल युवा पहले करियर से संबंधित और सेल्फ डेवलपमेंट की किताबें ज्यादा पढ़ते थे। अब वे रोमांटिंक किताबें, चेतन भगत, मानवी आहूजा, तुषार रहेजा, नीरज छिब्बर को पसंद कर रहे हैं। प्रोफेशनल्स पहले समसामयिक मुद्दे, राजनीति पर बेस्ड किताबें भी पढ़ते थे। वहीं आजकल वे सक्सेस के फंडे, पर्सनाल्टिी डेवलपमेंट, टाइम मैनेजमेंट, स्किल्स मैनजमेंट, बायोग्राफी और आटोबायोग्राफी को पढ़ रहे हैं।

      गृहिणी को चाहिए फिटनेस और फैशन

      गृहिणियां जहां पहले खान-पान स्वास्थ्य और धार्मिक किताबें पढ़ती थीं, वहीं आजकल लाइफ स्टाइल, फैशन इंटीरियर, फिटनेस मोटीवेशनल बुक्स उनकी पहली पसंद बन गईं हैं। इसके अलावा वे जासूसी उपन्यास, अगाथा क्रिस्टी, सिडनी शेल्डेन नॉवेल भी पसंद कर रही हैं।

      सीनियर सिटीजन हो रहे हाईटेक

      वरिष्ठ नागरिक भी अपने आप को ग्लोबलाइजेशन के दौर में अपडेट रखने के लिए कंप्यूटर और तकनीकों का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। वे पहले जहां धार्मिक और पौराणिक किताबें पढ़ते थे। वहीं अब फिक्शन भी पढ़ रहे हैं।

      दसवां बाल पुस्तक मेला आज से

      इंटरनेशनल बुक हाउस कई संस्थाओं के सहयोग से शुक्रवार को दसवें बाल पुस्तक मेले का आयोजन कर रहा है। एमपी नगर जोन एक स्थित थड्डाराम परिसर में होने वाले इस पुस्तक मेले में बच्चों की मनपसंद पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। मेले में बच्चों के व्यक्तिव विकास और मनोरंजन के लिए विश्व भर की ढेरों पुस्तकें मिलेंगी। मेला १७ दिनों तक चलेगा। उद्घाटन के मौके पर 'व्हाई आई एम नॉट सिविल सर्वेन्ट' के लेखक समेत कई वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित रहेंगे।

      पुस्तक मेला आयोजन समिति के संयोजक प्राशांत शर्मा ने बताया, मेले में बच्चों की बुक्स रियायती मूल्य में दी जाएंगी। इसमें ३ से १६ साल आयु के बच्चों के लिए जानेमाने लेखकों रस्किन बांड, एनिड ब्लायटन आदि की पुस्तकें मिलेंगी। ये पुस्तकें खासतौर सीडी में उपलब्ध होंगी।

      यहां क्रिएटिव एक्टिविटीज, सांइंस प्रोजेक्ट एंड एक्सपेरीमेंट, बाल मनोविज्ञान, आत्मसुधार, चाइल्ड डिक्शनरी, आर्ट एंड ड्राइंग, इंटीरियर डिजाइन आदि की बुक्स रहेंगी। मौके पर मेले का उद्घाटन भोपाल के ही इंजीनियरिंग के छात्र लेखक प्रणय साहू करेंगे। इन्होंेने मात्र २१ वर्ष की उम्र में अंग्रेजी नॉवेल 'गो ग्रेजुएट' लिखा है। मेले के उद्घाटन अवसर इस पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा। मेला पाठकों के लिए रविवार सहित प्रतिदिन सुबह ११ से ९ बजे तक खुला रहेगा।

      ई-मेल वायरस ने मचाया हंगामा





      नई दिल्ली. इंटरनेट पर एक नए वायरस ने हंगामा मचा रखा है। इस वायरस ने अभी तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा समेत दुनियाभर में लाखों कंप्यूटरों को निशाना बना लिया है। अगर आपके ई-मेल बॉक्स में 'हियर यू हैव','दिस इज द डॉक्यूमेंट आई टोल्ड यू अबाउट, यू कैन फाइंट इट हियर' या व्हीबी मैनिया जैसे संदेश या एड्रेस से कोई मेल नजर आए तो उसे फौरन हटा दें।

      इसे खोलने पर एक पॉर्न साइट का लिंक सामने आता है।

      इसके फौरन बाद वायरस कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम पर बैठ जाता है। यह कंप्यूटर को समूचे एड्रेस बुक को कॉपी कर लेता है। अभी तक कोई एंटी वायरस इसके खिलाफ कारगर नहीं हुआ है।

      अब कंप्यूटर पढ़ लेगा आपका मन

        लंदन. कल्पना कीजिए कि आपके कम्प्यूटर मानिटर पर वह वेबसाइट अपने आप खुल जाए जिसे आप खोलना चाहते हैं । जल्द ही आपकी कल्पनाओं को हकीकत के पर लगने वाले हैं,क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे कम्प्यूटर का विकास करने का दावा किया है जो मानव मस्तिष्क को पढ़ सकेगा।

        इंटेल कारपोरेशन में कार्यरत एक समूह एक ऐसी नयी प्रौद्योगिकी पर काम कर रहा है जो आपकी दिमागी सोच को पढ़ सकेगा । यह दिमाग से नियंत्रित होने वाले उस मौजूदा कम्प्यूटर से विपरीत होगा जिसमें स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक हरकत की दरकार होती है ।

        द टेलीग्राफ के अनुसार वास्तव में वैज्ञानिक,दिमाग में होने वाली हलचल से संबंधित गतिविधियों के नक्शे को लेकर शब्दों के ऐसे ताने बाने बुनने की कवायद में जुटे हैं जो आपकी उस दिमागी हलचल से मेल खाए जिसका प्रयोग कम्प्यूटर पर होता है ।

        प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कम्प्यूटर समान मस्तिष्क पैटर्न से संबंधित शब्दों के अनुसार काम कर सकेंगे ।

        इंटेल की प्रयोगशालाओं से जुड़े एक वरिष्ट शोधकर्ता डीन पोमेरलियाउ ने बताया कि मौजूदा समय में अस्पतालों में प्रयोग होने वाले मैगेनेटिक रेजोनेंस स्कैनर जेसे उपकरण की जरूरत है दिमागी गतिविधियों से जुड़े पर्याप्त विवरण को ग्रहण कर सके ।

        ऐसा कंप्यूटर जिसे आप पहन सकते हैं








        वाशिंगटन. यानी ऐसा कंप्यूटर जिसे आप अपने शरीर के चारों ओर पहन भी सकते हैं। एक स्वीडिश खोजकर्ता और उद्यमी मैगन्यूसॉन ने इसके लिए पहला कदम भी उठा लिया है।

        दरअसल पिछले काफी समय से वैज्ञानिक इस दिशा में काम कर रहे है कि कंप्यूटर को इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सके। मगर मैगन्यूसान ने इस दिशा में बढ़ते हुए पहना जा सकने वाल कंप्यूटर बना दिया है।

        मैगन्यूसान के मुताबिक कंप्यूटर एक खिड़की की तरह है जो हमे एक अनोखे वास्तविक संसार से जोड़ता है। परंतु हमे कुछ वास्तविक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है जिसके चलते हमे ज्यादातर समय यह खिड़की बंद मिलती है।

        अविष्कार में क्या

        अपने इस अविष्कार में मैग्न्यूसान ने देखने वाले चश्मे के साथ सर से लटकाए जा सकने वाली एक मशीन को जोड़ा है। इसे एक सीडी केस में पैक कर इस प्रकार बनाया गया है जिसे कंधे से लटकाए जाने वाले बैग की तरह लटकाया जा सकेगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर इसे फोल्ड भी किया जा सकता है। इस पहने जा सकने वाले कंप्यूटर में माययू चश्मों का इस्तेमाल किया गया है जो कि आम डिजायन चश्मों की तरह दिखाई देते हैं।

        कैसे करता है काम

        एक बेगलबोर्ड एंग्सट्रोम लिनेक्स और प्लेक्सगीयर मिनी यूएसबी की तरह काम करता है। चार २७क्क् एमएएच एए बैटरी इसे पावर देती है। वह इसके लिए फोल्डकी जा सकने वाली नोकिया कीबोर्ड का इस्तेमाल करते है। इसी के जरिए इसे ब्लूटूथ का इस्तेमाल कर इंटरनेट से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए आपकी जेब में एक आई फोन की जरूरत होगी। इसकी मेमोरी को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

        अपराधियों की कुंडली दिखेगी कंप्यूटर पर






        बल्लभगढ़. अब वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी दूसरे जिले या प्रदेश में पनाह लेकर चैन से नहीं रह सकेंगे। वारदातों व अपराधियों पर नकेल कसने के लिए गृह मंत्रालय की ओर से क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) बन रही है।

        इसके जरिए देशभर के थानों को एक ही नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। अमेरिका की तर्ज पर तैयार की गई इस योजना के प्रथम चरण में गुड़गांव में अमल शुरू किया जा चुका है। दूसरे चरण में हरियाणा के अन्य जिले फरीदाबाद, पानीपत, सोनीपत और पलवल में काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद अन्य जिले भी इस सिस्टम से जुड़ जाएंगे।

        विप्रो कंपनी कर रही काम

        इस योजना का साफ्टवेयर तैयार करने की जिम्मेदारी आईटी कंपनी विप्रो को दी गई है। इस सिस्टम को कारगर बनाने के लिए केंद्र सरकार दो हजार करोड़ रुपए की राशि जारी भी कर चुकी है। विप्रो कंपनी के सूत्रों के मुताबिक सीसीटीएनएस योजना का साफ्टवेयर बनकर लगभग तैयार हो चुका है।

        एनसीआरबी रखेगी नजर

        गृह मंत्रालय ने इस योजना की निगरानी रखने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को नोडल एजेंसी बनाया है। योजना के प्रथम चरण में गुड़गांव को पहले चुना गया है। वहां इस योजना पर काम शुरू हो चुका है। योजना के तहत जिला मिशन टीम का नाम देकर तकनीकी रूप से दक्ष पुलिस कर्मियों को साफ्टवेयर व पूरे सिस्टम के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सभी जिलों में अत्याधुनिक पुलिस कंट्रोल रूम बनाने के साथ-साथ जिला मिशन टीम का कार्यालय भी कंट्रोल रूम में ही खोला जाएगा।

        क्या कहते पुलिस अफसर

        ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर अनिल कुमार राव के अनुसार सीसीटीएनएस गृह मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण योजना है। यह जल्द ही फरीदाबाद सहित अन्य जिलों में अमल में लाई जाने वाली है। राव के अनुसार सीसीटीएनएस से गुड़गांव, दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा व एनसीआर के अन्य जिलों की पुलिस को इससे काफी राहत मिलेगी।

        सिस्टम से क्या होगा लाभ

        यह सिस्टम पुलिस महकमे के लिए काफी कारगर रहेगा। यदि कोई वारदात होती है और अपराधी दूसरे जिले या प्रदेश का रहने वाला है तो उसका नाम व पता होते ही उसके गृह क्षेत्र के थाने का कोड प्रयोग कर ऑनलाइन जानकारी दी जा सकेगी। साथ ही यह भी तुरंत पता कर लिया जाएगा कि उसके खिलाफ देश के किसी थाने में और मामले तो दर्ज नहीं हैं। अभी तक यह काम मैन्युअल तरीके से होता आ रहा है। इस सारी प्रक्रिया में समय भी ज्यादा लगता है और अपराधी तक पहुंचना भी मुश्किल होता है।

        सीसीटीएनएस के जरिए महीने का काम चंद पल में हो जाएगा। यह सिस्टम उन बदमाशों को चैन से नहीं रहने देगा जो एक जगह वारदात कर दूसरी जगह पनाह लेकर चैन से रहते हैं। कोई वारदात होने पर उस तरह की घटना से जुड़े दूसरे प्रदेश के थानों में नामजद बदमाशों की कुंडली सीसीटीएनएस के जरिए तुरंत बांचकर उनकी गतिविधियां आसानी से पता कर ली जाएंगी।

        बचपन बचाओ







        चंडीगढ़. नजर न आने वाले वायरस अभी तक कंप्यूटर और वीडियो गेम्स को चौपट करते थे, मगर अब बच्चों का दिमाग इनका नया ठिकाना बन रहा है। पीजीआई में पिछले दो महीनों में ऐसे 18 केस आ चुके हैं, जिसमें दिमागी बीमारी के शुरुआती लक्षण पाए गए। पेशंट बच्चे और वजह, कंप्यूटर और विडियो गेम्स पर जरूरत से ज्यादा वक्त गुजारना। दिमाग पर कसते इस शिकंजे पर रवि कुमार की रिपोर्ट-

        बीमारी की जड़

        स्कूल टाइम हो या छुट्टियों के दिन, बच्चों के पास खेलने के लिए कंप्यूटर और वीडियो गेम्स के बहुत सारे ऑप्शन हैं। वे चैटिंग और गेम्स खेलकर ही खुद को इंटरटेन करते हैं, लेकिन यह बच्चों के लिए सेफ नहीं है। इनके ज्यादा यूज करने से बच्चों में फोटोकनवर्सिस एपीलेप्सी बीमारी हो सकती है। हां इस बीमारी का तुरंत इलाज करवाना भी बहुत जरुरी है। चंडीगढ़ में भी ऐसे बच्चों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

        पीजीआई न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ मोदी ने बताया कि दो महीनों में 18 बच्चे इस बीमारी के इलाज के लिए आ चुके है। ये बच्चे 8 साल से लेकर 15 साल तक के हंै। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और टीवी के सामने बैठकर लगातार गेम खेलते रहने से इन बच्चों को फोटोकनवर्सिस एपीलेप्सी और माइग्रेन की शिकायत हो गई है।

        हां इन बीमारियों का तुरंत चेकअप कराएं, अगर इनका टाइम पर इलाज नहीं करवाया गया तो आगे जाकर ये घातक बीमारियों की जड़ हो सकती हैं। वे एक बच्चे के बारे में बताते हुए कहते हैं कि लगभग एकसाल पहले मेरे पास एक ऐसा बच्च आया था जिसको फोटोकनवर्सिस एपीलेप्सी बीमारी थी। उसकी गर्दन लगातार हिलती रहती थी। उसे इंजेक्शन लगाना भी मुश्किल होता था। उसका हिलना रोकने के लिए हाथ-पैर पकड़कर इंजेक्शन लगाया जाता था।

        दिमागी हालत खराब

        लगातार दिन में सात से आठ घंटे कंप्यूटर और टीवी के सामने बैठकर गेम्स खेलने से बच्चों की दिमागी हालत बिगड़ सकती है। इससे उनके व्यवहार में फर्क दिखने लगता है और उनको देखने में भी दिक्कत होने लगती है। इससे दिमाग का एक हिस्सा ज्यादा सक्रिय हो जाता है। जिसकी वजह से मिर्गी के दौरे भी पड़ने लगते हैं। यह प्रॉब्लम कंप्यूटर से निकलने वाली किरणों से होती है। यह किरणों सीधे दिमाग पर असर डालती हैं। मिर्गी, माइग्रेन के अलावा बच्चों में और भी कई प्रॉब्लम भी हो सकती है।

        क्या है फोटोकनवर्सिस एपीलेप्सी

        ज्यादा टाइम तक कंप्यूटर और टीवी के सामने बैठकर काम करने या गेम खेलने से होने वाली बीमारी को फोटोकनवर्सिस एपीलेप्सी कहा जाता है। इस बीमारी से दिमागी हालत बिगड़ने लगती है। इसमें दिमाग का एक हिस्सा ज्यादा एक्टिव हो जाता है। गर्दन का लगातार हिलना, चिड़चिड़ापन, आंखों का लगातार झपकना और जलन होना इस बीमारी के लक्षण है। यह बीमारी कंप्यूटर और टीवी से निकलने वाली किरणों से होती है।

        क्या करें क्या न करें

        बच्चों को ज्यादा देर तक वीडियो गेम और ऑनलाइन गेम न खेलने दें।
        बच्चे के व्यवहार में आए अचानक बदलाव के बाद डॉक्टर को दिखाएं।
        सिर में और आंखों में दर्द रहने पर डॉक्टर की सलाह लें।

        कैथल में कंप्यूटर सेंटर खोलेंगे बिल गेट्स





         


          कैथल. कंप्यूटर साफ्टवेयर के जनक बिल गेट्स कैथल की आईटीआई में एक सेंटर खोलने जा रहे हैं। इस सेंटर में युवाओं को हर तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कंप्यूटर से लेकर लैंग्वेज में युवाओं को माहिर करने के लिए यह सेंटर स्थापित किया जा रहा है।

          इसके लिए सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से अप्रूवल दे दी है। जल्दी ही आईटीआई कैथल की आईएमसी सोसायटी तथा माइक्रोसॉफ्ट के बीच एमओयू साइन होने जा रहा है। प्रदेश के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसकी पुष्टि की है।

          अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंप्यूटर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट इस क्षेत्र के युवाओं को कंप्यूटर पर आधारित नवीनतम प्रणाली के बारे में जानकारी देगी। यहां से प्रशिक्षण लेकर युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंप्यूटर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उतर सकेंगे। इस संदर्भ में कंपनी के प्रबंधकों से बात हो चुकी है। कंपनी द्वारा केंद्र सरकार को लगभग 8000 करोड़ रुपए दिए गए हैं। प्रदेश में कैथल की आईटीआई को इस सेंटर के लिए चुना गया है।

          तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक शारदा प्रसाद की अध्यक्षता में प्रदेश की सभी आईटीआई प्रतिनिधियों की वर्कशाप दो बार हुई। दोनों बार कैथल की आईटीआई को सर्वोत्तम घोषित किया गया। जब प्रदेश में माइक्रोसॉफ्ट के कंप्यूटर सेंटर को खोलने की बात चली तो सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रणदीप सुरजेवाला ने कैथल की आईटीआई की पैरवी की, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूर कर लिया।

          फैकल्टी व पैकेज माइक्रोसॉफ्ट के

          इस कंप्यूटर सेंटर के लिए आधारभूत ढांचा कैथल आईटीआई को मुहैया कराना है बाकि सभी जिम्मेदारी माइक्रोसॉफ्ट की होगी। आईटीआई में एक पुराने हॉस्टल के तीन हजार स्कवेयर फीट के भवन की रिपेयर कर उसे इस कंप्यूटर सेंटर के लिए तैयार कर दिया गया है। इसमें फैकल्टी, सिलेबस और पैकेज बाकि सभी माइक्रोसॉफ्ट के अख्तियार में होंगे। इस कंप्यूटर को पूर्णतया माइक्रोसॉफ्ट द्वारा संचालित किया जाएगा।

          माइक्रोसॉफ्ट का कंप्यूटर सेंटर कैथल में खोलने के लिए सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्वीकृति दे दी है। जल्दी ही कैथल आईटीआई की आईएमसी सोसायटी और माइक्रोसॉफ्ट के बीच एमओयू होगा। कैथल की आईटीआई में विश्व स्तरीय व्यक्तित्व के युवा तैयार किए जाएंगे जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम करेंगे।

          रणदीप सिंह सुरजेवाला, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हरियाणा

          कंप्यूटर से बदले जाएंगे घुटनों के जोड़






          उदयपुर.अहमदाबाद के अस्थि रोग विशेषज्ञ डा. दिलीप पटेल का कहना है कि अब घुटनों के जोड़ बदलने में कंप्यूटरीकृत तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है। जर्मनी से प्राप्त इस तकनीक से प्लास्टिक या मेटल के जोड़ कंप्यूटर की सहायता से बदले जाने लगे हैं।

          शनिवार को यहां ओरियंटल पैलेस रिसॉर्ट में डा. पटेल ने पत्रकार वार्ता में बताया कि जर्मनी तकनीक से जोड़ बदलने की प्रक्रिया में ऑपरेशन के हिस्से के दोनों तरफ सेंसेज लगाकर इंफरारेट कैमरे के माध्यम से नया जोड़ लगाया जाता है।


          जोड़ में मेटल व प्लास्टिक लाइनर का उपयोग किया जाता है। डा. पटेल ने कहा कि यह गलत धारणा है कि ऊंची एड़ी के जूते पहनने से घुटनों के जोड़ों पर असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि ऊंची ऐड़ी के जूते पहनने के पंजे और कूल्हे की हड्डियां कमजोर पड़ती हैं।







          वकालत का पेशा इन दिनों बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस क्षेत्र का तेजी से बदलता परिदृश्य दक्ष अधिवक्ताओं के लिए कॅरियर के विविध विकल्प पेश कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि आप विभिन्न अदालती निर्णयों से खुद को अपडेट रखें, जिनका मुकदमों में रिफरेंस के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

          क्या आपने कभी सोचा है कि आज ज्यादातर लोग लॉ में कॅरियर क्यों बनाना चाहते हैं, जबकि उन्हें इसके कई अधिनियम याद रखने पड़ते हैं और इसकी धाराओं को समझना पड़ता है? इसका सिर्फ एक ही जवाब है कि अपने तर्र्को के जरिए दूसरों से अपनी बात मनवाने की चुनौती का आनंद ही कुछ अलग है। जो लोग पहले से इस पेशे से जुड़े हैं, उनका कहना है कि जिरह करने का रोमांच, अपनी दलीलों के जरिए दूसरों को संतुष्ट करने की कला जैसी बातें आपको इस क्षेत्र में रहने का उत्साह देती हैं। कानूनी समस्याओं को सुलझाना तो वकालत के पेशे से जुड़ा सिर्फ एक पहलू है।

          पेशे के बारे में
          यह एक ऐसा क्षेत्र हैं, जिसमें कॅरियर के कई विकल्प उपलब्ध हैं। आज देश-विदेश में माहिर वकीलों की काफी मांग है। पिछले कुछ समय के दौरान लीगल प्रोफेशन में काफी बदलाव आया है। एक दशक पहले तक किसी ने कारपोरेट लॉ या कांट्रेक्ट लॉ के बारे में सुना भी नहीं होगा, लेकिन समाज में तेजी से हो रहे बदलावों ने आज क्रिमिनल लॉ, सिविल लॉ, लेबर लॉ, फैमिली लॉ, कारपोरेट लॉ, कांट्रेक्ट लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ और इंटरनेशनल लॉ जैसे कई विशिष्ट कानूनों को जन्म दिया है। जयपुर के प्रख्यात वकील पीयूष शर्मा कहते हैं, 'वकालत को कॅरियर के रूप में अपनाने वाले शख्स को इस पेशे में रोमांच के साथ-साथ बौद्धिक संतुष्टि भी मिलती है। हालांकि सफल वकील बनने के लिए जरूरी है कि आप विभिन्न अदालती निर्णयों के बारे में लगातार अपडेट रहें। कोई मुकदमा लड़ते समय इन अदालती निर्णयों का हवाला दिया जा सकता है।'

          इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति को इस तकनीक से जुड़ी नई-नई गतिविधियों के लगातार संपर्क में रहना चाहिए और विभिन्न मुकदमों का नियमित अध्ययन करते रहना चाहिए ताकि किसी केस में जिरह करते वक्त उचित बिंदुओं का हवाला दिया जा सके। इसी शहर के एक और प्रख्यात वकील नरेंद्र मेवाड़ा जो पिछले दस वर्र्षो से इस पेशे में हैं, का कहना है कि यह कुशाग्र बुद्धि वालों के लिए एक आदर्श पेशा है। वह कहते हैं, 'ऐसा व्यक्ति जिसका बौद्धिक स्तर बेहतर हो और जिसमें तार्किक रूप से जिरह करने की क्षमता हो, वह इस पेशे को अपना सकता है।' हालांकि नए-नए वकीलों को हो सकता है कि शुरुआत में सही तरह के केस और मुवक्किल न मिलें, लेकिन उन्हें अधीर नहीं होना चाहिए। एक बार वे अपने लक्ष्य में कामयाब हो गए, तो फिर उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ेगा।

          विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वकालत का पेशा सबसे भरोसेमंद कॅरियर विकल्पों में से एक है और इंजीनियरिंग व मेडिकल कॅरियर की तरह इस कॅरियर में भी उछाल देखा जा रहा है। पीयूष शर्मा कहते हैं, 'शुरुआत से ही लॉ स्टूडेंट्स को अपने विचारों में स्पष्टता और तार्किक सोच को रखना चाहिए। वे विभिन्न केस स्टडीज का विश्लेषण करें, जटिल कानूनी मसलों पर रिसर्च करें और लिखित व मौखिक संवाद में महारत हासिल करने की कोशिश करें।'

          अन्य पेशों की तरह इस पेशे में भी उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि इसमें सम्मान के साथ-साथ अच्छी कमाई के अवसर भी मिलते हैं। यदि व्यक्ति सही समय पर उचित अवसरों का दोहन कर सके तो इसमें उसके आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।'

          योग्यता व रोजगार
          लॉ की कोई भी डिग्री इस क्षेत्र में आपके लिए पेशेवर अवसरों की अनेक राह खोल सकती है। आप चाहें तो सरकारी न्यायिक सेवा या प्रतिरक्षा सेवा में काम कर सकते हैं, प्राइवेट या पब्लिक सेक्टर की किसी कंपनी में जा सकते हैं, किसी लॉ फर्म में भी आपको रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा आपके पास प्राइवेट प्रैक्टिस करने का विकल्प तो हमेशा मौजूद है ही।

          जहां कई वकील आम प्रैक्टिशनर बन प्रॉपर्टी डील, अनुबंध पत्र इत्यादि तैयार करने जैसे रोजमर्रा के काम करते रहते हैं, वहीं कुछ लोग कारपोरेट लॉ, कांस्टीट्यूशनल लॉ और सिविल लॉ में विशेषज्ञता हासिल कर ऊंचा नाम और दाम कमाते हैं। हमारे देश में लीगल प्रोसेस आउटसर्ो्िसग की प्रक्रिया भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। अनेक विश्वविद्यालय आज बारहवीं पास विद्यार्थियों के लिए पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स चलाते हैं। कई यूनिवर्सिटीज में अंडरग्रेजुएट लॉ कोर्स भी चलाया जाता है।

          वैसे आज लॉ फ्रैशर्स कारोबारी फर्म्स के साथ जुड़ना ज्यादा पसंद करते हैं, जिनमें कमाई त्वरित होती है। कई कारपोरेट्स ने अपने यहां रोजमर्रा के मैनेजमेंट के हिसाब से इनहाउस काउंसिलिंग के लिए भी वकीलों की भर्ती करनी शुरू कर दी है। इसके अलावा आप चाहें तो कानूनी सलाहकार भी बन सकते हैं। साफ है कि इस क्षेत्र में आपके लिए अवसरों की कमी नहीं है। बस अपने रुझान के मुताबिक सही राह को पहचान उस पर आगे बढ़ने की जरूरत है।


          संस्थान
          नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु
          नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद
          नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर
          हयातुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, रायपुर
          नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल
          वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूडिशियल साइंसेस, कोलकाता।

          महत्वपूर्ण परीक्षाएं
          कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट (क्लेट)
          सिंबॉयोसिस एंट्रेंस टेस्ट
          ऑल-इंडिया एंट्रेंस एग्जाम (एनएलयू)
          सीईटी
          लॉ स्कूल एडमिशन टेस्ट-इंडिया (एलएसएटी-इंडिया)
          एंट्रेंस एग्जाम- आईआईटी खड़गपुर