गरीबी ने हंसाना सिखाया: सुदेश लहरी

गरीबी ने हंसाना सिखाया: सुदेश लहरी
कॉमेडी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले सुदेश लहरी को आज हर कोई जानता है। लेकिन यह ऊंचाई उन्हें कितनी परेशानियों के बाद मिली है, बता रहे हैं इस मुलाकात में..
अपने बारे में बताएंगे?
लोग यही जानते हैं कि मेरा जन्म अमृतसर में हुआ हे, लेकिन यह सही नहीं है। मेरा जन्म जालंधर के बस्ती गुजां में हुआ। मेरे पिता हरबंस लाल और माता सीता रानी कामकाज के सिलसिले में अमृतसर आ गए। यहां पर कई ठिकाने बदले, लेकिन मेरा बचपन इस्लामाबाद के गुरुनानक पुरा में गुजरा। मेरे पिता सोने के आभूषण बनाने के अच्छे कारीगर थे, लेकिन अधिकांश कमाई वे शराब में उड़ा देते थे। घर के आर्थिक हालात ठीकन होने पर मुझे स्कूल जाने के बजाए नौकरी के लिए कभी चाय की दुकान, तो कभी अन्य दुकानों की राह पकड़नी पड़ी, लेकिन दिल को सुकून भी है कि आज मैं जिस मुकाम पर हूं, वहां तक मुझे उसी मेहनत ने पहुंचाया है, जो बचपन में मैंने की थी।
आज आपकी चुलबुली बातों पर लोग ठहाके लगाते हैं, कैसा लगता है?
लोगों की ठहाकों के पीछे मेरा दर्द छुपा हुआ है, जो मैंने बचपन से लेकर कुछ साल पहले तक झेला है। मैंने गरीबी देखी है और गरीबी ने ही मुझे लोगों को हंसाना सिखाया है।
अब आपका परिवार मुंबई में शिफ्ट हो चुका है। पंजाब की याद आती है?
जब भी समय मिलता है, मैं अमृतसर आना नहीं भूलता। मेरी कई पंजाबी फिल्में आने वाली हैं।
आपकी नजर में क्या होती है कॉमेडी?
कॉमेडी बस चलते-फिरते बन जाती है। पंजाबी तो हंसने-हंसाने से लेकर खाने-खिलाने में नंबर वन हैं। बस थोड़ा तड़का बातों में लग जाए, तो बस कॉमेडी तैयार हो जाती है। मैं अधिकांश कॉमेडी अपने आसपास से इकट्ठा करता हूं।
अमृतसर से मुबंई तक के सफर में क्या अंतर दिखा आपको?
अंतर ही अंतर है। आज मैं अधिक स्मार्ट हो गया हूं, लोग अब मुझे जानते हैं। पहले बताना पड़ता था कि मैं सुदेश लहरी हूं। आज लोग सुदेश लहरी को खुद पहचान लेते हैं। खुशी है कि अब तक 100 से अधिक शो विदेश में कर चुका हूं। लोगों का प्यार मिलता है, तो भूल जाता हूं कि मैं देश में हूं या विदेश में।
कोई ऐसी कसक, जो अभी भी दिल में है?
आज भी मैं किसी चाय की दुकान पर बर्तन धोते बच्चे को देखता हूं, तो मुझे अपना बचपन याद आ जाता है। आज मेरे पास सब कुछ है, लेकिन विद्या नहीं। मैं पढ़ न सका। शायद इतने बड़े मुकाम पर पहुंचने वाला में ऐसा पहला कलाकार हूं, जिसका किसी स्कूल में नाम नहीं लिखा गया, लेकिन मैंने खुद को आवश्यकता के अनुरूप ढाला है। थोड़ी-बहुत पढ़ाई की है।
आपको पहचान कब मिली?
मुझे लाफ्टर चैलेंज-3 में हिस्सा लेने के लिए बिना किसी ऑडिशन के बुला लिया गया। मैं घबरा रहा था। मुझे हिंदी आती नहीं थी, लेकिन स्टेज पर जब हिंदी-पंजाबी का तड़का लगाया, तो लोगों ने जमकर तालियां बजाई। वह दिन मेरी कामयाबी का पहला दिन था। उसके बाद मुझे कॉमेडी सर्कस से नई पहचान मिली। आज जो कुछ भी हूं बस ऊपर वाले की बदौलत, लोगों के प्यार और कॉमेडी सर्कस की वजह से हूं।
आपकी आने वाली हिंदी और पंजाबी फिल्में कौन-कौन-सी हैं?
मेरी आने वाली हिंदी फिल्म रेडी है, जिसमें हीरो सलमान खान हैं। फिल्म के डायरेक्टर अनीस बज्मी हैं। कई पंजाबी फिल्मों में भी दिखूंगा।
अपने चाहने वालों से क्या कहेंगे? मैं बस यही कहूूंगा कि लोगों का प्यार ऐसे ही मिलता रहे, ताकि हरेक बाधा को हंसते-हंसते पार कर जाऊं। हसरत यही है कि पंजाब की संस्कृति से मरते दम तक जुड़ा रहूं।

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